Ghazal Likhna Seekhein: 32 बहरें, अरूज़ के नियम और बारीकियाँ

Piyush Mishra
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Ghazal Likhna Seekhein: 32 बहरें, अरूज़ के नियम और बारीकियाँ

ग़ज़ल (Ghazal)... यह शब्द अरबी भाषा के 'गज़ा' से निकला है, जिसका अर्थ होता है— "माशूक (प्रेमी) से बातें करना"

ग़ज़ल का सफ़र 10वीं सदी में ईरान से शुरू हुआ, जहाँ रुदकी जैसे शायरों ने इसे तराशा। भारत में इसकी नींव अमीर ख़ुसरो ने रखी, जिन्होंने फ़ारसी और हिंदवी (ब्रजभाषा) को मिलाकर शायरी की। उसके बाद वली दक्कनी, मीर तक़ी 'मीर' और मिर्ज़ा ग़ालिब ने इसे उस मुक़ाम पर पहुँचा दिया जहाँ यह बादशाहों के दरबार से निकलकर आम आदमी के दिल की धड़कन बन गई।

दुष्यंत कुमार ने इसे हिंदी में एक नई पहचान दी। आज ग़ज़ल सिर्फ़ प्रेम नहीं, बल्कि क्रांति और समाज की आवाज़ भी है।

अगर आप इस विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको इसके 'तकनीकी पक्ष' (Technical Aspects) को समझना होगा। तुकबंदी करके आप 'गीतकार' तो बन सकते हैं, लेकिन 'शायर' बनने के लिए आपको अरूज़ (Prosody) की आग में तपकर निकलना होगा।

यह गाइड इंटरनेट पर मौजूद सबसे विस्तृत दस्तावेज़ है, जिसमें इतिहास से लेकर 32 बहरों की सटीक लिस्ट शामिल है।

1. ग़ज़ल के प्रकार और शेरों की संख्या

(A) शेरों की संख्या (Number of Shers)

अक्सर नए लेखक पूछते हैं कि ग़ज़ल कितनी लंबी होनी चाहिए?

  • न्यूनतम (Minimum): 5 शेर। (5 से कम शेर वाली रचना को ग़ज़ल नहीं माना जाता, उसे 'क़ता' या मुक्तक कह सकते हैं)।
  • अधिकतम (Maximum): कोई निश्चित सीमा नहीं है, लेकिन 19-21 शेर तक की ग़ज़लें देखी गई हैं।
  • आदर्श (Ideal): आमतौर पर मुशायरों और किताबों में 5, 7, 9 या 11 शेर (विषम संख्या/Odd Numbers) रखने का रिवाज़ है।


(B) ग़ज़ल के प्रकार (Types of Ghazal)

1. ग़ज़ल-ए-ग़ैर-मुसलसल
(Ghair-Musalsal)
यह सबसे आम रूप है। इसमें हर शेर का विषय अलग होता है। पहला शेर इश्क़ पर हो सकता है, तो दूसरा राजनीति पर। हर शेर अपने आप में एक पूरी दुनिया होता है।
2. ग़ज़ल-ए-मुसलसल
(Musalsal)
इसमें सभी शेर एक ही विषय या एक ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। इसमें निरंतरता (Continuity) होती है। (जैसे- चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है)।
3. आज़ाद ग़ज़ल
(Azad Ghazal)
आधुनिक दौर में कुछ कवियों ने बहर के नियमों को थोड़ा ढीला करके 'आज़ाद ग़ज़ल' लिखी है। हालाँकि, शुद्धतावादी (Purists) इसे ग़ज़ल नहीं मानते।

2. ग़ज़ल की संरचना (Anatomy)

ग़ज़ल का शरीर इन 4 अंगों से बनता है। एक भी अंग ग़ायब हुआ, तो ग़ज़ल अपंग कहलाएगी।

उदाहरण:
"हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।" — (ग़ालिब)
  • रदीफ़ (Radif): 'निकले'। (वह शब्द जो हर शेर के अंत में 100% सेम टू सेम रिपीट हो)।
  • क़ाफ़िया (Qaafiya): 'दम' और 'कम'। (रदीफ़ से ठीक पहले आने वाला तुकांत शब्द। इसमें स्वर/आवाज़ का मिलना ज़रूरी है)।
  • मतला (Matla): ग़ज़ल का पहला शेर। ख़ासियत: इसके दोनों मिसरों में रदीफ़-क़ाफ़िया होता है।
  • मक्ता (Maqta): ग़ज़ल का आख़िरी शेर। ख़ासियत: इसमें शायर अपना तख़ल्लुस (Pen Name) इस्तेमाल करता है।

3. ग़ज़ल कैसे कहें? (Step-by-Step Writing Process)

ग़ज़ल 'लिखी' नहीं जाती, ग़ज़ल 'कही' जाती है। यहाँ शून्य से शिखर तक का रास्ता है:

Step 1: आमद (The Arrival of Thought)

सबसे पहले एक विचार (Idea) पकड़ें। मान लीजिए आपके मन में विचार आया— "किसी के बिछड़ने का दुख।"

Step 2: बहर का चुनाव (Choosing Meter)

अब अपने विचार को गुनगुना कर देखें। उसे एक लय (Rhythm) दें। क्या वह 1222 में फिट हो रहा है या 2122 में?
टिप: शुरुआत में बहर-ए-हजज़ (1222 1222) चुनें।

⚠️ ज़रूरी: बहर चुनने से पहले मात्राओं का ज्ञान होना अनिवार्य है। यहाँ क्लिक करके सीखें: 👉 काव्य में मात्रा गणना (Matra Ganna Rules)

Step 3: रदीफ़ और क़ाफ़िया तय करना

अब एक तुकबंदी सेट करें।
क़ाफ़िया: जाना, आना, पाना, ज़माना।
रदीफ़: 'होगा'।
ढांचा तैयार: ... जाना होगा / ... आना होगा।

Step 4: मतला कहना (The Foundation)

अब पहली दो लाइनें (मतला) बनाएँ जिनमें दोनों में तुकबंदी हो।
"उसे अब लौट कर वापस, यहाँ आना होगा,
मोहब्बत क्या है ये उसको, बताना होगा।"


4. 32 बहरों की सम्पूर्ण लिस्ट (The Complete List of 32 Meters)

यहाँ हिंदी और उर्दू शायरी में इस्तेमाल होने वाली 32 प्रमुख बहरों की लिस्ट दी गई है। हर बहर का अपना एक यूनिक कोड (Meter) है।

संकेत:
1 = लघु (Short)
2 = गुरु (Long)

# बहर का नाम (Meter Name) मीटर कोड (Meter Code)
A. बहर-ए-हजज़ (Hazaj Family)
1 हजज़ मुसम्मन सालिम 1222 1222 1222 1222
2 हजज़ मुसम्मन महज़ूफ़ 1222 1222 1222 122
3 हजज़ मुसम्मन अशतर 1212 1222 1212 1222
4 हजज़ मुसम्मन अख़रब (मक़्बूज़) 122 1212 122 1212
5 हजज़ मुसम्मन अख़रब 2212 2212 2212 2212
6 हजज़ मुसद्दस सालिम 1222 1222 1222
7 हजज़ मुसद्दस महज़ूफ़ 1222 1222 122
8 हजज़ मुसम्मन मतवी 2222 2222 2222 2222 ( rare)
B. बहर-ए-रमल (Ramal Family)
9 रमल मुसम्मन सालिम 2122 2122 2122 2122
10 रमल मुसम्मन महज़ूफ़ 2122 2122 2122 212
11 रमल मुसम्मन मख़बून 2122 1122 2122 1122
12 रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ 2122 1122 2122 112
13 रमल मुसद्दस सालिम 2122 2122 2122
14 रमल मुसद्दस महज़ूफ़ 2122 2122 212
15 रमल मुसद्दस मख़बून 2122 1122 2122
C. बहर-ए-रजज़ (Rajaz Family)
16 रजज़ मुसम्मन सालिम 2212 2212 2212 2212
17 रजज़ मुसम्मन मतवी 2212 212 2212 212
18 रजज़ मुसम्मन मख़बून 1212 1212 1212 1212
D. बहर-ए-मुतकारिब (Mutaqarib Family)
19 मुतकारिब मुसम्मन सालिम 122 122 122 122
20 मुतकारिब मुसम्मन मक़सूर 122 122 122 2
21 मुतकारिब मुसम्मन अ़सरम 22 22 22 22
E. बहर-ए-मुतदारिक (Mutadarik Family)
22 मुतदारिक मुसम्मन सालिम 212 212 212 212
23 मुतदारिक मुसम्मन मक़तू 22 22 22 22
F. मिश्रित बहरें (Mixed/Complex)
24 बहर-ए-कामिल 11212 11212 11212 11212
25 बहर-ए-वाफ़िर 12112 12112 12112 12112
26 बहर-ए-ख़फ़ीफ़ (सालिम) 2122 1222 2122
27 बहर-ए-ख़फ़ीफ़ (मक़्बून महज़ूफ़) - *Best* 2122 1222 22
28 बहर-ए-मुज़ारा (अख़रब) 2212 2212 2212 2212
29 बहर-ए-मुज़ारा (मिश्रित) 1222 1222 2122
30 बहर-ए-मुजतस 2122 1222 2122 1222
31 बहर-ए-सरी (Musamman) 2212 2212 2212 2212
32 बहर-ए-मुनसराह 2212 2212 2212 2212

5. तक़्ती और अपवाद (Scansion & Rules)

तक़्ती का मतलब है शेर का 'पोस्टमॉर्टम' करना और यह देखना कि वह बहर में है या नहीं।

महत्वपूर्ण अपवाद (Exceptions to Remember)

  1. अलिफ़ का गिरना: लय बनाए रखने के लिए 'मेरा, तेरा' को 'मिरा, तिरा' (12) पढ़ा जा सकता है।
  2. इज़ाफ़त (e): 'दिल-ए-नादां' में 'ए' की मात्रा को आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से 1 या 2 मान सकते हैं।
  3. 'वो' और 'जो': इन्हें 2 की जगह 1 भी गिना जा सकता है।
  4. नाक की आवाज़ (N): 'मैं, हैं, क्यों' में अनुस्वार (बिंदी) की मात्रा नहीं जुड़ती। ये सब 2 मात्रा (गुरु) हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

यह 32 बहरों की लिस्ट एक शायर का सबसे बड़ा हथियार है। शुरुआत करने के लिए आप केवल पहली 10 बहरों पर ध्यान दें।

लिखते रहें, और Scribble Hindi के साथ जुड़े रहें!

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