कविता लिखना केवल भावनाओं का खेल नहीं है, यह एक 'गणित' (Mathematics) भी है।
कई बार हम बहुत गहरे भाव लिखते हैं, लेकिन पढ़ने वाले को वह 'अटका' हुआ महसूस होता है। उसमें वो रवानगी (Flow) नहीं होती जो एक अच्छी शायरी या दोहे में होनी चाहिए। इसका कारण है— मात्राओं का गलत गणित।
चाहे आप तुलसीदास की चौपाई लिखना चाहें या मिर्ज़ा गालिब जैसी गज़ल, अगर आपको मात्रा गणना (Matra Counting) नहीं आती, तो आप 'तुकबंदी' तो कर सकते हैं, लेकिन 'कवि' नहीं बन सकते।
इस विस्तृत गाइड (Ultimate Guide) में हम पिंगल शास्त्र के उन नियमों को सीखेंगे जो किताबों में अक्सर उलझा दिए जाते हैं। हम केवल बेसिक नियम नहीं, बल्कि "उच्चारण आधारित अपवाद" को भी गहराई से समझेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
- 1. मूल अवधारणा: लघु (1) और गुरु (2) क्या हैं?
- 2. स्वरों की गणना (अ, आ, इ, ई के नियम)
- 3. विशेष नियम: अनुस्वार, विसर्ग और चंद्रबिंदु
- 4. संयुक्त अक्षर (आधा वर्ण) का 'भार' नियम (Important)
- 5. 'लय' के विशेष अपवाद ('तुम्हारा' और मात्रा गिराना) - Advanced
- 6. उदाहरण: दोहा, चौपाई और गज़ल (सही मीटर के साथ)
- 7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. मूल अवधारणा: लघु और गुरु (Basics of Meter)
हिंदी छंद शास्त्र (पिंगल) में वर्णों के भार (Weight) को मापने के लिए दो इकाइयाँ होती हैं। इसे आप संगीत की 'बीट्स' समझ सकते हैं।
लघु (Laghu)
- मान (Value): 1 मात्रा
- चिन्ह (Symbol): । (खड़ी पाई)
- उच्चारण: पलक झपकने जितना समय।
गुरु (Guru)
- मान (Value): 2 मात्रा
- चिन्ह (Symbol): ऽ (अवग्रह या S)
- उच्चारण: लघु से दुगुना समय।
2. स्वरों की गणना (Counting Vowels)
एक बात हमेशा याद रखें: मात्रा हमेशा स्वरों (Vowels) की गिनी जाती है, व्यंजनों की नहीं। व्यंजन (जैसे क, ख) बिना स्वर के अधूरे हैं।
| स्वर का प्रकार | वर्ण (Matra) | भार (Value) |
|---|---|---|
| ह्रस्व स्वर (Short) | अ, इ, उ, ऋ | 1 (लघु) |
| दीर्घ स्वर (Long) | आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ | 2 (गुरु) |
उदाहरण:
- क (क + अ) = 1 मात्रा
- का (क + आ) = 2 मात्रा
- कि (क + इ) = 1 मात्रा
- की (क + ई) = 2 मात्रा
3. विशेष नियम: अनुस्वार, विसर्ग और चंद्रबिंदु
यहाँ अक्सर नए लेखक गलती करते हैं। इन 3 नियमों को ध्यान से समझें:
(A) अनुस्वार (बिंदी - ं) = 2 मात्रा
जिस वर्ण के ऊपर बिंदी (Anuswar) लगी हो, वह गुरु (2) हो जाता है।
- हंस = हं (2) + स (1) = 3 मात्रा
- रंग = रं (2) + ग (1) = 3 मात्रा
(B) विसर्ग (:) = 2 मात्रा
जिस वर्ण के बाद विसर्ग लगा हो, वह भी गुरु (2) होता है।
- दुःख = दुः (2) + ख (1) = 3 मात्रा (भले ही 'उ' छोटा है, पर विसर्ग ने उसे बड़ा कर दिया)।
(C) चंद्रबिंदु (ँ) = 1 मात्रा (लघु)
यह सबसे बड़ा अपवाद है। चंद्रबिंदु (Moon dot) केवल नाक से बोला जाता है, यह वर्ण का समय नहीं बढ़ाता।
- हँस = हँ (1) + स (1) = 2 मात्रा
- हंस (2+1=3) और हँस (1+1=2) में यही अंतर है।
- आँख = आँ (2) + ख (1) = 3 मात्रा (यहाँ 'आ' पहले से गुरु है, चंद्रबिंदु का असर नहीं पड़ा)।
4. संयुक्त अक्षर (आधा वर्ण) का 'भार' नियम
काव्य शास्त्र का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण हिस्सा यही है। "आधा अक्षर खुद तो नहीं गिना जाता, लेकिन वह अपने पड़ोसी को भारी कर देता है।"
उदाहरण 1: 'सत्य' (Satya)
यहाँ 'त' आधा है।
- वैसे तो 'स' 1 मात्रा है।
- लेकिन 'त्य' बोलते समय जोर 'स' पर पड़ रहा है (उच्चारण: सत्-य)।
- इसलिए, स = 2 (गुरु) हो जाएगा।
- 'य' = 1 (लघु) रहेगा।
- कुल मात्रा: 2 + 1 = 3
उदाहरण 2: 'कष्ट' (Kasht)
- 'क' के बाद आधा 'ष्' है।
- भार 'क' पर पड़ा। इसलिए क = 2।
- 'ट' = 1।
- कुल: 2 + 1 = 3
नियम: जब भार न पड़े (Start of word)
अगर आधा अक्षर शब्द के शुरू में हो, तो उसका भार पीछे कहीं नहीं जा सकता, इसलिए उसकी कोई मात्रा नहीं जुड़ती।
- प्यार: 'प्' शुरू में है। इसका मान 0। 'या' (2) + 'र' (1) = 3 मात्रा।
- स्थान: 'स्' (0) + 'था' (2) + 'न' (1) = 3 मात्रा।
5. 'लय' के विशेष अपवाद (Advanced Rules)
काव्य शास्त्र का एक और गहरा नियम है— "मात्रा वही, जो बोली जाए।" कभी-कभी व्याकरण के नियम कुछ और कहते हैं, लेकिन बोलने में (Flow/Laya) कुछ और आता है। यहाँ दो सबसे बड़े अपवाद लागू होते हैं:
(A) 'तुम्हारा' और 'तुम्हें' का नियम (उच्चारण आधारित)
हमने ऊपर पढ़ा कि आधा अक्षर पिछले वर्ण को गुरु (2) कर देता है। लेकिन कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिन्हें बोलते समय आधे अक्षर का जोर (Stress) पिछले वर्ण पर नहीं पड़ता।
शब्द: तुम्हारा, तुम्हें, कुम्हार, कन्हैया, जिन्होंने।
विश्लेषण (तुम्हारा):
- व्याकरण के अनुसार: तु (1) + म् (आधा) = तुम (2) होना चाहिए।
- लेकिन उच्चारण में: हम इसे 'तुम्...हारा' (रुककर) नहीं बोलते। हम इसे जल्दी में 'तु-म्हारा' बोलते हैं। सारा जोर 'हा' पर है, 'तु' पर नहीं।
- निष्कर्ष: गज़ल और गीतों में अक्सर 'तुम्हारा', 'तुम्हें' आदि में पहले वर्ण को लघु (1) ही गिना जाता है।
- सही गणना: तु (1) + म् (0) + हा (2) + रा (2) = 122 (लगागा)।
(B) मात्रा गिराना (Isqaat - दीर्घ को लघु मानना)
उर्दू शायरी (अरूज़) में इसे 'इसकात' कहते हैं। कभी-कभी बहर (Meter) को साधने के लिए कवि जानबूझकर 'बड़ी मात्रा' को 'छोटा' कर देते हैं, बशर्ते वह पढ़ने में अजीब न लगे।
उदाहरण:
| शब्द | मूल मात्रा | गिराने के बाद (उच्चारण) |
| मेरी | 2 - 2 (Guru-Guru) | 1 - 2 (Laghu-Guru) (उच्चारण: मिरी) |
| कोई | 2 - 2 | 2 - 1 (उच्चारण: कोयि) |
| तेरा | 2 - 2 | 1 - 2 (उच्चारण: तिरा) |
नोट: यह छूट केवल स्वर के अंत में या निपात (Particles) शब्दों (जैसे- की, भी, ही, हो) में ली जाती है। आप 'आकाश' के 'आ' को छोटा नहीं कर सकते, क्योंकि वह शब्द की जड़ है।
6. उदाहरण: दोहा, चौपाई और गज़ल (Practical Calculation)
आइये, अब इन सारे नियमों को वास्तविक काव्य पर लागू करके देखते हैं।
(A) दोहा (Doha) की गणना
नियम: 13-11 मात्राएँ (कुल 24)।
श्रीगुरू चरन सरोज रज...
गणना:
- श्री (2) + गु (1) + रू (1)* = 4
(नोट: यहाँ 'गुरू' शब्द 'बड़ा' वाला नहीं है, हनुमान चालीसा में 'गुर' का प्रयोग है, इसलिए रू=1) - च (1) + र (1) + न (1) = 3
- स (1) + रो (2) + ज (1) = 4
- र (1) + ज (1) = 2
योग: 4 + 3 + 4 + 2 = 13 मात्रा (पहला चरण पूर्ण)।
(B) चौपाई (Chaupai) की गणना
नियम: प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
गणना:
- जय: 1+1 = 2
- हनुमान: 1+1+2+1 = 5
- ज्ञान: 2+1 = 3 (ज्ञ=2)
- गुन: 1+1 = 2
- सागर: 2+1+1 = 4
योग: 2 + 5 + 3 + 2 + 4 = 16 मात्रा।
(C) उर्दू शायरी/गज़ल (Corrected Meter)
गज़ल: हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले... (मिर्ज़ा ग़ालिब)
बहर का नाम: बहर-ए-हजज़ मुसम्मन सालिम
मीटर (वज़न): 1222 - 1222 - 1222 - 1222 (मफाईलुन - मफाईलुन - मफाईलुन - मफाईलुन)
तक्ती (Scansion/गणना):
ह (1) + ज़ा (2) + रों (2) + ख्वा (2)*
= ह-ज़ा-रों-ख्वा (1222)
हि (1) + शें (2) + ऐ (2) + सी (2)
= हि-शें-ऐ-सी (1222)
कि (1) + हर (2) + ख्वा (2) + हिश (2)
= कि-हर-ख्वा-हिश (1222)
पे (1)* + दम (2) + निक (2) + ले (2)
= पे-दम-निक-ले (1222)
(नोट: यहाँ 'पे' की मात्रा गिराकर 1 मानी गई है।)
*विशेष: उर्दू बहर में एक शब्द का आखिरी अक्षर अगले शब्द के पहले अक्षर के साथ मिलकर 'वज़न' पूरा कर सकता है। इसे ही लय (Flow) कहते हैं।
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: 'ऋ' की मात्रा 1 होती है या 2?
हिंदी पिंगल शास्त्र में 'ऋ' (जैसे- कृपा, गृह) को लघु (1) माना जाता है।
Q2: 'मैं' और 'हैं' की मात्रा 3 क्यों नहीं होती?
'मैं' में 'ऐ' की मात्रा है जो पहले से गुरु (2) है। अनुस्वार उसे और बड़ा नहीं कर सकता क्योंकि 2 से बड़ी कोई मात्रा नहीं होती। इसलिए 'मैं', 'हैं', 'क्यों' = 2 मात्रा।
Q3: क्या मैं ऑनलाइन टूल से मात्रा गिन सकता हूँ?
हाँ, लेकिन टूल्स अक्सर 'संयुक्त अक्षरों' के भार और 'तुम्हारा' जैसे अपवादों को नहीं समझ पाते। इसलिए मैनुअल (हाथ से) गिनना ही सबसे सटीक तरीका है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मात्रा गणना (Matra Ganna) शुरू में गणित की पहेली जैसी लग सकती है, लेकिन अभ्यास से यह संगीत बन जाती है। याद रखें, "आधा अक्षर पिछले को भारी करता है" और "लय (Flow) व्याकरण से बड़ी है"—बस ये दो मंत्र याद कर लें, तो आपकी 90% मुश्किलें आसान हो जाएंगी।
अब अपनी पुरानी कविताओं को निकालें और उनकी मात्राएँ गिनकर देखें। Scribble Hindi के साथ जुड़े रहें!

