सच-सच बताइए... क्या कभी रात के सन्नाटे में छत को घूरते हुए ऐसा लगा है कि "आखिर जीवन में चल क्या रहा है?"
हम सब एक अजीब सी दौड़ का हिस्सा बन गए हैं। एक हाथ में स्मार्टफोन है जो हमें पूरी दुनिया की खबरें दे रहा है, और दूसरे हाथ में 'Anxiety' है जो हमें अंदर से खोखला कर रही है। हमें लगता है कि अगर 25 की उम्र तक हम सफल नहीं हुए, तो जीवन व्यर्थ है। दूसरों की 'Social Media Story' देखकर हम अपनी हकीकत को कोसने लगते हैं।
ऐसे समय में, 161 साल पहले जन्मे एक युवा संन्यासी का स्मरण हो आना स्वाभाविक है—स्वामी विवेकानंद।
लोग उन्हें अक्सर 12 जनवरी को याद करते हैं, उनकी तस्वीरों पर पुष्प अर्पित करते हैं। लेकिन सत्य तो यह है कि आज हमें उनकी माला की नहीं, उनके विचारों की आवश्यकता है। आज हम सीधी बात करेंगे कि स्वामी जी के वे 5 मूल विचार (Original Quotes) क्या थे, जो आज के दिशाहीन युवा को सही रास्ता दिखा सकते हैं।
1. खुद को 'बेचारा' समझना बंद करें
"If you have faith in all the three hundred and thirty millions of your mythological gods... and still have no faith in yourselves, there is no salvation for you."
"भले ही तुम 33 करोड़ देवी-देवताओं पर विश्वास कर लो, लेकिन अगर तुम्हें 'खुद' पर विश्वास नहीं है, तो तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता।"
— Complete Works, Vol. 3, Pg. 190
हमारा सबसे बड़ा संघर्ष यही है कि हम अपनी परिस्थितियों को दोष देते रहते हैं— "मेरे पास साधन नहीं हैं," "मेरा समय खराब है।"
सीधी बात:
विवेकानंद अगर आज होते, तो शायद कहते— "रुकिए! यह 'Victim Card' खेलना बंद कीजिये।" जब आप दर्पण में देखकर स्वयं को कमजोर कहते हैं, तो आप वास्तव में अपने भीतर बैठे ईश्वर का अपमान कर रहे होते हैं। संसार आपका सम्मान तब तक नहीं करेगा जब तक आप स्वयं का सम्मान करना नहीं सीखेंगे।
2. 'लोग क्या कहेंगे' का भय त्यागें
"Strength is Life, Weakness is Death."
"शक्ति ही जीवन है, कमजोरी ही मृत्यु है। शक्ति शाश्वत सुख है, कमजोरी कभी न खत्म होने वाला कष्ट है।"
— Complete Works, Vol. 2, Pg. 3
हमें असफल होने से उतना डर नहीं लगता, जितना इस बात से लगता है कि "पड़ोसी क्या कहेंगे?" या "रिश्तेदार ताने देंगे।"
सीधी बात:
स्वामी जी को 'कायरता' से सख्त नफरत थी। उनका सिद्धांत स्पष्ट था—गलती करें, हजार बार करें, लेकिन भय के कारण प्रयास करना न छोड़ें। जो व्यक्ति भयभीत होकर 100 वर्ष जिया, उससे श्रेष्ठ वह है जो 30 वर्ष जिया, परन्तु सिंह की भांति निर्भीक होकर जिया। जोखिम लीजिये, क्योंकि 'Comfort Zone' में आराम तो है, किन्तु प्रगति (Growth) नहीं।
3. एक लक्ष्य चुनें और उसमें डूब जाएं
"Take up one idea. Make that one idea your life — think of it, dream of it, live on that idea."
"एक विचार लो। उस एक विचार को अपना जीवन बना लो—उसी के बारे में सोचो, उसी के सपने देखो, उसी विचार को जियो।"
— Raja Yoga, Vol. 1
यह आज के डिजिटल युग के लिए सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है। हमारा मस्तिष्क विचलित है। 5 मिनट पढ़ाई, फिर 15 मिनट सोशल मीडिया। हम 'Multitasking' के भ्रम में अपनी एकाग्रता नष्ट कर रहे हैं।
सीधी बात:
यदि आप वास्तव में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो यह 'थोड़ा इधर, थोड़ा उधर' वाला दृष्टिकोण छोड़ना होगा। स्वामी जी कहते थे—सूर्य की किरणें भी तब तक कागज नहीं जला सकतीं जब तक उन्हें एक बिंदु पर केंद्रित न किया जाए। एक लक्ष्य चुनें और अपनी पूरी ऊर्जा उसी में झोंक दें।
4. डिग्री आवश्यक है, पर 'चरित्र' अनिवार्य है
"We want that education by which character is formed, strength of mind is increased... and by which one can stand on one's own feet."
"हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र बने, मानसिक बल बढ़े, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके।"
— Complete Works, Vol. 5, Pg. 342
हमारे पास डिग्रियां बहुत हैं, पर क्या हमारे पास 'चरित्र' (Character) है? हम सफलता के लिए छोटे रास्ते (Shortcuts) खोजते हैं।
सीधी बात:
कॉर्पोरेट जगत में प्रतिभा (Talent) आपको प्रवेश दिला सकती है, लेकिन वहां आपको स्थापित करता है आपका चरित्र। स्वामी जी मानते थे कि चालाकी से कोई महान कार्य सिद्ध नहीं होता। सफल होने के लिए केवल 'बुद्धिमान' होना पर्याप्त नहीं है, 'ईमानदार' होना भी उतना ही आवश्यक है।
5. केवल अपने लिए जीना व्यर्थ है
"They alone live who live for others, the rest are more dead than alive."
"जीते बस वही हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं, बाकी तो जीवित होते हुए भी मृत समान हैं।"
— Complete Works, Vol. 4, Pg. 363
अवसाद (Depression) का एक बड़ा कारण हमारा अत्यधिक आत्मकेंद्रित (Self-Obsessed) होना है। हम सदैव यही सोचते हैं— "मेरा क्या होगा? मुझे क्या मिला?"
सीधी बात:
कभी अनुभव कीजियेगा, जिस दिन आप निस्वार्थ भाव से किसी की सहायता करते हैं, उस दिन आपको असीम शांति मिलती है। क्यों? क्योंकि उस क्षण आपका अहंकार विलीन हो जाता है। अपने जीवन का उद्देश्य केवल "मैं और मेरा परिवार" से थोड़ा बड़ा कीजिये।
निष्कर्ष
विवेकानंद के विचार पढ़ने में अच्छे लगते हैं, लेकिन ये कोई जादुई मंत्र नहीं जो रातों-रात असर करेंगे। इनका प्रभाव तभी होगा जब आप इन्हें अपने आचरण में उतारेंगे।
तो उठिए! स्वयं को पहचानिये और तब तक मत रुकिए जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।
— जय हिन्द! 🇮🇳 —