हिंदी की 100+ प्रसिद्ध लोकोक्तियाँ (Proverbs) और उनके अर्थ

Piyush Mishra
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हिंदी लोकोक्तियाँ (Hindi Proverbs)

अर्थ, प्रयोग और परीक्षा उपयोगी संग्रह


हिंदी भाषा की सुंदरता उसकी लोकोक्तियों (Proverbs) में छिपी है। इन्हें हम 'कहावतें' भी कहते हैं। ये वो अनमोल वचन हैं जो हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन के अनुभवों को निचोड़कर बनाए हैं। चाहे UPSC हो, PCS, SSC, या Teaching Exams—लोकोक्तियों से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।

1. लोकोक्ति क्या है? (Definition)

परिभाषा: 'लोकोक्ति' शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: 'लोक + उक्ति'
अर्थात, लोक (समाज) में प्रचलित वह कथन जो किसी विशेष प्रसंग या स्थिति पर सटीक बैठता है और जिसमें कोई गहरा अनुभव छिपा होता है, उसे लोकोक्ति कहते हैं।

लोकोक्ति अपने आप में एक पूर्ण वाक्य होती है। इसका प्रयोग किसी बात की पुष्टि करने, विरोध करने या उपदेश देने के लिए किया जाता है। इसे 'जनश्रुति' या 'कहावत' भी कहा जाता है।

2. इतिहास और उत्पत्ति

लोकोक्तियों का कोई एक लेखक नहीं होता। इनकी रचना मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ हुई है। ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी, पशु-पालन और सामाजिक व्यवहार से मिले अनुभवों को जब लोगों ने एक लयात्मक (Rhythmic) वाक्य में पिरोया, तो लोकोक्तियाँ बनीं।

जैसे— "नाच न जाने आँगन टेढ़ा"—यह कहावत तब बनी होगी जब किसी ने अपनी कमी छिपाने के लिए साधनों को दोष दिया होगा। ये मौखिक परंपरा से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती आ रही हैं।

3. मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर (Difference)

परीक्षा में अक्सर छात्र इनमें भ्रमित हो जाते हैं। इसे इस टेबल से समझें:

आधार मुहावरा (Idiom) लोकोक्ति (Proverb)
स्वरूप यह वाक्यांश (Phrase) होता है। यह पूर्ण वाक्य (Sentence) होता है।
परिवर्तन लिंग, वचन, काल के अनुसार बदल जाता है। (जैसे: आँख दिखाना / दिखाई) इसका स्वरूप कभी नहीं बदलता। यह ज्यों की त्यों रहती है।
प्रयोग वाक्य के बीच में प्रयोग होता है। वाक्य के अंत में स्वतंत्र रूप से प्रयोग होती है।
उदाहरण अक्ल पर पत्थर पड़ना। अधजल गगरी छलकत जाए।
📌 सम्बंधित लेख: क्या आप मुहावरों का विस्तृत संग्रह भी पढ़ना चाहते हैं?
👉 यहाँ क्लिक करें: हिंदी मुहावरे (Hindi Idioms) - अर्थ और वाक्य प्रयोग

4. 100+ महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ (Exam Collection)

यहाँ परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाने वाली लोकोक्तियों का संग्रह दिया गया है:

(क) ज्ञान और मूर्खता से जुड़ी लोकोक्तियाँ

  • 1. अधजल गगरी छलकत जाए अर्थ: कम ज्ञानी व्यक्ति अपने ज्ञान का अधिक दिखावा करता है।
  • 2. अंधों में काना राजा अर्थ: मूर्खों के बीच थोड़ा सा ज्ञान रखने वाला भी विद्वान माना जाता है।
  • 3. अक्ल बड़ी या भैंस अर्थ: शारीरिक बल से बुद्धि बल श्रेष्ठ होता है।
  • 4. काला अक्षर भैंस बराबर अर्थ: बिल्कुल अनपढ़ होना।
  • 5. थोथा चना बाजे घना अर्थ: जिसमें गुण कम होते हैं, वह दिखावा अधिक करता है।

(ख) कार्य और परिणाम से जुड़ी लोकोक्तियाँ

  • 6. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत अर्थ: समय निकल जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं होता।
  • 7. आम के आम गुठलियों के दाम अर्थ: दोहरा लाभ होना।
  • 8. ऊँची दुकान फीका पकवान अर्थ: केवल बाहरी दिखावा, अंदर कुछ नहीं।
  • 9. ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डरना अर्थ: कठिन काम शुरू करने पर कष्टों से घबराना नहीं चाहिए।
  • 10. खोदा पहाड़ निकली चुहिया अर्थ: अधिक परिश्रम करने पर भी बहुत कम फल मिलना।
  • 11. नाच न जाने आँगन टेढ़ा अर्थ: अपनी कमी छिपाने के लिए दूसरों (साधनों) को दोष देना।
  • 12. ना नौ मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी अर्थ: ऐसी शर्त रखना जो पूरी न हो सके, ताकि काम न करना पड़े।

(ग) व्यवहार और संगति

  • 13. खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है अर्थ: संगति का असर अवश्य पड़ता है।
  • 14. घर का भेदी लंका ढाए अर्थ: आपसी फूट या करीबी व्यक्ति की गद्दारी सर्वनाश का कारण बनती है।
  • 15. चोर-चोर मौसेरे भाई अर्थ: एक जैसे स्वभाव वाले बुरे लोग आपस में मित्र बन जाते हैं।
  • 16. जिसकी लाठी उसकी भैंस अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति की ही विजय होती है (बलवान का बोलबाला)।
  • 17. जैसा देस वैसा भेस अर्थ: जहाँ रहना हो, वहीं की रीति-नीति के अनुसार आचरण करना चाहिए।

(घ) विपत्ति और मजबूरी

  • 18. आगे कुआँ पीछे खाई अर्थ: हर तरफ से मुसीबत होना।
  • 19. आसमान से गिरा खजूर में अटका अर्थ: एक मुसीबत से निकलकर दूसरी में फँस जाना।
  • 20. गरीबी में आटा गीला अर्थ: विपत्ति में और विपत्ति आना।
  • 21. धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का अर्थ: जिसका कहीं ठिकाना न हो, निरर्थक व्यक्ति।
  • 22. रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई अर्थ: बर्बाद होने पर भी घमंड न जाना।

(ङ) अन्य महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ (Part 1)

  • 23. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता अर्थ: अकेला व्यक्ति कोई बहुत बड़ा कार्य संपन्न नहीं कर सकता।
  • 24. अपनी डफली अपना राग अर्थ: सबका अपने-अपने मन के अनुसार चलना / संगठन का अभाव।
  • 25. आँख का अंधा नाम नयनसुख अर्थ: गुणों के विपरीत नाम होना।
  • 26. उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे अर्थ: अपना अपराध स्वीकारने के बजाय पूछने वाले को ही धमकाना।
  • 27. एक पंथ दो काज अर्थ: एक साधन से दो काम पूरे होना।
  • 28. का वर्षा जब कृषि सुखाने अर्थ: समय बीत जाने पर सहायता मिलने का कोई लाभ नहीं।
  • 29. खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे अर्थ: शर्मिंदा होकर या असफल होकर दूसरों पर क्रोध निकालना।
  • 30. घर की मुर्गी दाल बराबर अर्थ: घर की वस्तु या व्यक्ति का आदर नहीं होता।
  • 31. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए अर्थ: अत्यधिक कंजूस होना।
  • 32. चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रात अर्थ: सुख थोड़े समय के लिए ही होता है।
  • 33. चोर की दाढ़ी में तिनका अर्थ: अपराधी हमेशा शंकित और डरा हुआ रहता है।
  • 34. दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है अर्थ: एक बार धोखा खाने के बाद व्यक्ति बहुत सावधान हो जाता है।
  • 35. दूर के ढोल सुहावने होते हैं अर्थ: दूर से चीजें अच्छी लगती हैं, सच्चाई पास आने पर पता चलती है।
  • 36. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद अर्थ: मूर्ख व्यक्ति गुणों का महत्व नहीं समझ सकता।
  • 37. भागते भूत की लंगोटी ही सही अर्थ: जहाँ कुछ न मिलने की उम्मीद हो, वहाँ थोड़ा भी मिल जाए तो बहुत है।
  • 38. मान न मान मैं तेरा मेहमान अर्थ: जबरदस्ती किसी के गले पड़ना।
  • 39. सौ सुनार की, एक लोहार की अर्थ: निर्बल की सौ चोटों की अपेक्षा बलवान की एक ही चोट काफी होती है।
  • 40. हाथ कंगन को आरसी क्या अर्थ: प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
  • 41. होनहार बिरवान के होत चीकने पात अर्थ: महान बनने वाले व्यक्ति के गुण बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं।

(च) लालच और स्वार्थ (Greed & Selfishness)

  • 42. अँधेर नगरी चौपट राजा अर्थ: जहाँ मुखिया मूर्ख हो, वहाँ अन्याय होता है / कुप्रशासन।
  • 43. अपना हाथ जगन्नाथ अर्थ: अपना काम स्वयं करना ही सबसे अच्छा होता है।
  • 44. आम के आम गुठलियों के दाम अर्थ: किसी काम में दोहरा लाभ होना।
  • 45. जिसकी लाठी उसकी भैंस अर्थ: शक्तिशाली की ही विजय होती है।
  • 46. तू डाल-डाल मैं पात-पात अर्थ: एक से बढ़कर एक चालाक होना।
  • 47. मुँह में राम बगल में छुरी अर्थ: ऊपर से मित्रता और मन में शत्रुता रखना (कपटी मित्र)।
  • 48. हाथ सुमरनी बगल कतरनी अर्थ: कपटी व्यवहार करना।

(छ) असफलता और बहाने (Failure & Excuses)

  • 49. अंगूर खट्टे हैं अर्थ: जो वस्तु न मिले, उसमें दोष निकालना।
  • 50. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत अर्थ: अवसर बीत जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं।
  • 51. काबुल में क्या गधे नहीं होते अर्थ: मूर्ख या बुरे लोग सभी जगह पाए जाते हैं।
  • 52. न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी अर्थ: कार्य न करने के लिए असंभव शर्त रखना।
  • 53. सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है अर्थ: सुखी व्यक्ति को सबकी स्थिति सुखी ही लगती है / पक्षपाती दृष्टिकोण।

(ज) संबंध और परिवार (Relations)

  • 54. बाप न मारी मेंढकी, बेटा तीरंदाज अर्थ: पिता से अधिक पुत्र का समर्थ होना (अक्सर व्यंग्य में)।
  • 55. बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय अर्थ: जैसे कर्म करोगे, वैसा ही फल मिलेगा।
  • 56. भाई-भाई की लड़ाई, जैसे कुत्ते की लडाई अर्थ: अपनों का झगड़ा बहुत बुरा होता है।
  • 57. चोर-चोर मौसेरे भाई अर्थ: दुष्ट लोग आपस में मित्र बन जाते हैं।

(झ) 50+ अन्य महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ (Rapid Fire List)

ये वे लोकोक्तियाँ हैं जो अक्सर विकल्पों (Options) में आती हैं:

  • 58. अंधा क्या चाहे दो आँखें - बिना प्रयास के मनचाही वस्तु मिलना।
  • 59. अंत भला तो सब भला - कार्य का परिणाम अच्छा हो तो सब ठीक माना जाता है।
  • 60. अक्ल के पीछे लठ लिए फिरना - मूर्खतापूर्ण कार्य करना।
  • 61. अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है - अपने क्षेत्र में कमजोर भी बलवान होता है।
  • 62. आँख का अंधा गाँठ का पूरा - मूर्ख लेकिन धनवान।
  • 63. आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास - उच्च लक्ष्य लेकर चलना पर निम्न कार्य में लग जाना।
  • 64. ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया - भाग्य की विचित्रता (कोई सुखी, कोई दुखी)।
  • 65. उलटे बाँस बरेली को - विपरीत कार्य करना।
  • 66. ऊँट के मुँह में जीरा - आवश्यकता से बहुत कम वस्तु मिलना।
  • 67. ऊँट किस करवट बैठता है - परिणाम अनिश्चित होना (देखें क्या होता है)।
  • 68. एक अनार सौ बीमार - वस्तु कम और माँग अधिक।
  • 69. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा - एक दोष के साथ दूसरा दोष भी होना।
  • 70. एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं - दो समान अधिकार वाले लोग एक साथ नहीं रह सकते।
  • 71. ओस चाटे प्यास नहीं बुझती - कम वस्तु से बड़ी आवश्यकता पूरी नहीं होती।
  • 72. कंगाली में आटा गीला - मुसीबत पर मुसीबत आना।
  • 73. कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा - बेमेल वस्तुओं को मिलाकर कुछ बनाना।
  • 74. काला अक्षर भैंस बराबर - बिल्कुल अनपढ़।
  • 75. खोदा पहाड़ निकली चुहिया - परिश्रम अधिक, लाभ कम।
  • 76. खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे - अपनी शर्म छिपाने के लिए व्यर्थ में झुँझलाना।
  • 77. गंगा गए गंगादास, यमुना गए यमुनादास - सिद्धांतहीन व्यक्ति (दल बदलू)।
  • 78. घर का भेदी लंका ढाए - आपसी फूट हानिकारक होती है।
  • 79. घर की मुर्गी दाल बराबर - घर की वस्तु का महत्व न समझना।
  • 80. चिराग तले अँधेरा - दूसरों को उपदेश देने वाले का स्वयं का आचरण ठीक न होना।
  • 81. चोर की दाढ़ी में तिनका - अपराधी का शंकित रहना।
  • 82. जैसी करनी वैसी भरनी - कर्म के अनुसार फल मिलना।
  • 83. जो गरजते हैं वो बरसते नहीं - डींग मारने वाले काम नहीं करते।
  • 84. ढाक के तीन पात - स्थिति में कोई बदलाव न होना (सदा एक सा)।
  • 85. तेते पाँव पसारिए, जेती लांबी सौर - अपनी सामर्थ्य के अनुसार खर्च करना चाहिए।
  • 86. दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है - एक बार धोखा खाकर व्यक्ति सावधान हो जाता है।
  • 87. दूर के ढोल सुहावने - दूर से सब अच्छा लगता है।
  • 88. धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का - जिसका कहीं ठिकाना न हो।
  • 89. न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी - झगड़े की जड़ को ही नष्ट कर देना।
  • 90. नाच न जाने आँगन टेढ़ा - अपनी कमी छिपाने के लिए साधनों को दोष देना।
  • 91. नीम हकीम खतरे जान - अल्पज्ञानी से काम कराना खतरनाक होता है।
  • 92. नेकी कर दरिया में डाल - उपकार करके भूल जाना चाहिए।
  • 93. पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल - योग्यता के अनुसार काम न मिलना।
  • 94. पाँचों उंगलियाँ घी में होना - सब तरफ से लाभ ही लाभ होना।
  • 95. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद - मूर्ख गुणों की परख नहीं कर सकता।
  • 96. बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी - संकट को ज्यादा देर तक टाला नहीं जा सकता।
  • 97. बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा - संयोग से काम बन जाना।
  • 98. मन चंगा तो कठौती में गंगा - मन पवित्र हो तो तीर्थ जाने की जरूरत नहीं।
  • 99. मुख में राम बगल में छुरी - कपटी मित्र।
  • 100. रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई - बर्बाद होने पर भी घमंड न जाना।
  • 101. लातों के भूत बातों से नहीं मानते - दुष्ट लोग भय से ही मानते हैं।
  • 102. सावन हरे न भादों सूखे - सदैव एक सी स्थिति रहना।
  • 103. सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे - बिना नुकसान के काम बन जाना।
  • 104. सिर मुड़ाते ही ओले पड़े - कार्य शुरू करते ही विघ्न आना।
  • 105. सुनिए सबकी, करिए मन की - सलाह सबसे लें, पर निर्णय स्वयं लें।
  • 106. सौ सुनार की एक लुहार की - निर्बल की सौ चोटों पर बलवान की एक चोट भारी पड़ती है।
  • 107. हथेली पर सरसों नहीं जमती - काम होने में समय लगता है, जल्दबाजी नहीं चलती।
  • 108. हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और - कहना कुछ और, करना कुछ और।
  • 109. होनहार बिरवान के होत चीकने पात - महान बनने के लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं।
  • 110. जंगल में मोर नाचा किसने देखा - गुण का प्रदर्शन उपयुक्त स्थान पर न हो तो उसका महत्व नहीं होता।

5. परीक्षा में याद रखने के टिप्स (Exam Tips)

  • संदर्भ समझें: लोकोक्ति को रटने के बजाय उसके पीछे की कहानी या ग्रामीण संदर्भ को समझें। जैसे 'अधजल गगरी' का मतलब है आधी भरी हुई मटकी जो छलकती है।
  • वाक्य प्रयोग: केवल अर्थ याद न करें, मन में एक वाक्य बनाएं। इससे अर्थ हमेशा याद रहेगा।
  • विलोम पहचानें: कई लोकोक्तियाँ एक-दूसरे की विरोधी होती हैं (जैसे- 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता' बनाम 'एक और एक ग्यारह होते हैं')। इन्हें साथ में पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: मुहावरे और लोकोक्ति में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: मुहावरा एक 'वाक्यांश' (Phrase) होता है जो वाक्य का अंग बनकर प्रयुक्त होता है (जैसे: 9-2-11 होना), जबकि लोकोक्ति एक 'पूर्ण वाक्य' होती है जो स्वतंत्र रूप से बोली जाती है (जैसे: अधजल गगरी छलकत जाए)।

प्रश्न: लोकोक्ति का प्रयोग कब किया जाता है?

उत्तर: किसी बात को प्रभावशाली बनाने, उदाहरण देने, व्यंग्य करने या किसी सत्य को प्रमाणित करने के लिए लोकोक्ति का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न: लोकोक्ति को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

उत्तर: लोकोक्ति को अंग्रेजी में Proverb या Saying कहते हैं।

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